१९ चैत्र २०८२, बिहीबार
बि प्लस खबर

रिक्सा चालकसे लैके सोनो चाँदी पसल संचालक

खबर सम्बाददाता ८ बैशाख २०८२, सोमबार
रिक्सा चालकसे लैके सोनो चाँदी पसल संचालक

रिक्सा चालकसे लैके सोनो चाँदी पसल संचालक तक, जा यात्रा इत्तो सजिलो ना रहए । पर कडी मेहनत, लगनशिल और अपन हुनर निखारत जा मुकाममे पुगे हएँ धनगढी उपमहानगरपालिका वडा नं. १५ के हरि मिलन राना ।
एक समान्य परीवारमे जल्मे भए ३३ वर्षके हरी मिलन आज न्यू राना सुनचाँदी गहना पसलके संचालक हएं । बिनकी घर उर्मा गाउंमे हए,आजसे लगभग १८ वर्ष अग्गुके हरी मिलन सम्खत हएं त बहुत संघर्ष और कठिनाइसे जुडी भै जिन्दगी रहए ।
हरी मिलन प्लस टु धनगडीमे डेरा धर्के पढत रहएं,बहे समयमे बे एक लौंडियाके प्रेम हुइजात हए । बे बिनसे अच्छेसे बेहा करनके चाहत रहएं । पर लौंडिया हितुवा घरानेकी होनके कारणसे जा सम्भव ना रहए । हरीमिलन बिनके भजाएके लाएक अपन डेरामे रखालैं बिनके लगोकी ऐसे करहओं त सायद हमके हमर घरबाले कुछ दिन पिच्छु स्विकारलेहएं ।
पर बिनके जा पता ना रहएकी बिनकी जा एक गल्तीकी कारणसे दुई परीवारको नाता टुटजएहए,बिनके दुनौ परीवारके स्विकार नाकरहएं ।
एक महीना दुइ महीना करत करत दुइ साल बितगए पर तहुँ हरी मिलनकी ससुरार बाले बिनकी जोडी ना स्विकारी इतए हरीमिलनके घरके मनै स्विकार कर्के बिनकी बेहा कर्दैं ।
हरी मिलन कहात हएंकी मिर बेहा बिना डिजे टेन्टको भओ रहए । ऐसे सम्खत हओंत आजकाल अच्छो ना लागत हए । बे कहात हएंकी जब मय बैयर करोता कोइ पाप करो जैसो हुइगओ रहए । घरपरीवारसे कछु साथ ना मिलत रहए । मय अपन और अपन बैयरकी पेट पालन ताहीं रिक्सा चलान सुरु करो हम धनगडी मे रहात रहएं डेरा लैके । कछु प्रगती ना होबए चखना खानके फीर मुशकील । इत्तो आफतसे रिक्सा चलाएकराओं दिनभर इतए उतए कभी पानी प्यास लगए त बेही फोहर हाथसे पानी पिमओ कभी फोहर पानी भि पिन पडए जेहीक कारणसे बिमार पडजामओं,पखाला पकडलेबए तौ एकदिन सम्खो जा कामसे जिन्दगी ना चलापएहओं मय कछु दुसरो काम ढुडन पडो । ऐसी एकदिन मीर रिक्सामे दुइ दरोहा बैठे बे मुस कहीं हमके तय जखौर तालसे घुमाएला तुक हम २० रुपैया देहएं । हरी मिलन खुशी हुइके बिनके जखौर ताल पुरो घुमाएक क्याम्पस चोक घेना लाएक पसलमे रुकबाइं । हुन बैठके बे आदमी फिर दारु पिलै,दारु पिके बे मनै मुस पुछी की भैया तय कितका पढो हए । मय जवाफ दव की १२ सम्म पढो हव ददा तओ बे मुस कही रिक्सा चलाएके कीतका कमाएलेत हए,मय जवाफ दव जिन्दगी गुजारन फिर अघटो हुइरहो हए का करओं मजबुरी हए पेट पालन ताहीं करन पडत हए। फिर बो आदमी मुस कहीं १२ पढो हए दिखानमे फिर सुधो हए,मेहनती हए,कोइ दुसरो काम करैगो मुस पुछी मय बिनकी बात सुनके खुस हुइगओ मय कहो हां करहओं ददा फिर बे मुस कहीं कल जा ठिहामे अजैए,,मय मन्जुर हुइगओ ।
बो दिन मय २० रुपैया के ताहीं बिनकी संग देर रात तक रहो फिर भोरभए मय हदाएक बिनहीक बुलाओ ठिहामे पुग्गओ बे मुक चिन ना पाइं काहेकी बो रात बे नसामे कही रहएं मुस पर मय कामके ताहीं भटकन बालो आदमी बिनकी बात सच मानके चलोगओ । जब बे मुक ना चिनपाइं तओ मय बिनके रातकी बात बतओ तओ बिनके लगो कि जा त सचमे आइगओ ।ंं फिर बे सम्खी अब जाके ताहीं काम पता लगानए पडो मुस कही भैया कल्ह आइए तले मय इतए कामके ताहीं जुगाड मिलएहओं। फिर बक भोरभए मय फिर गइभओ तओ कही एक सुनचाँदी पसलमे काम त हए पर महीनक १५०० रुपैया दिबैया हए । मय सोचो १५०० मे का हुइहए मीर डेराए भाडामे चलोजएहए । फिर कहीं की १८०० देहए काम करएत कर नत कछुना मय काम करलेहओ कहो तओसे मय बहे सुनचाँदी पसलमे काम करन लागो । झाडुपोछा लगानको काम करओं कभी मालिकको घरको काम फिर करनके जामओं ।
बो समय मीर और मिर बैयरके ताहीं इतनो कठिन रहए,१८०० रुपैया तलब बो मैसे ११०० रुपैया कोठा भांडा तिरए बची रुपैयासे तेल,नुन,मिर्चा,चखना किनएं चामर ता घरसे जैसेन तैसे करके लियात रहएं। हरी मिलन कहात हएंकी हम एक आलुको चखना खात रहएं हमेसा आलु से अलावा कछु चखना किनान अवस्था ना रहए,एक आलुम कितनो पिस हुइहएं पर बो एक आलु पकाएके मय मिर बैयर खात रहएं। इतनो कठिन अवस्थामे फिर मिर बैयर मिर साथ ना छोडी, हरी मिलन कहात हएंकी कोइफिर तिज त्युहार भओ आपन रानाथरुवाके घर मासमच्छी पकत हए मोके फिर बहुत मनसे लागत रहए मासमच्छी पर काकरओं अवस्था ऐसो रहएकी कभी बुट्टी मच्छी ना किनके खाएपात रहएं । पर कभु कभु इतनो खबासी लगए तओ मए मुर्गाकी भोण,गाजी किनके लात रहओं १० रुपैयाकी ४ भोण देत रहए बहे खाएके मन बुझात रहए ,बुट्टी २५० रुपैयाक देत रहए सोउना किनपामएं । एकदिन बुट्टी गजब खबासी लगी तओ बो दिन फिर मए भोण किनके लैजात रहओं तओ झिल्ली फटके भोण गिरगै और अग्गुसे मिर क्यामपसके संगी आमए मय सरमके मारे बे ४ भोण जल्दी जल्दी उठाओ और दौरत गइभओ । ३ वर्ष तक हम बुट्टी ना खानपाए । कोइसे फिर कछु बात कहीतोता बैयर भजान ताही भजालओ अब पाल बैयर ऐसे कहीदेमए । आजकाल सबकुछ हए तओ मिर बैयर कहात हए पहीले ना खान पाए रहएं अब खालेओ ।
फिर हरि मिलन पहीलेक बात सम्खत हएं कहात हएं,मय बो सुनचांदी पसलमे काम करओं हुना तमान सोनो बनान बाले सुनरा के देखके मेरु सिखन मन लगए मय बिनके चुप्पे चुप्पे देखे करओं मालिक मुक बिनके घेना जानएना देबए मय सिखजाङगो सोचके फिरभि मय चुप्पेसे देखओं । फिर एकदिन मय सोचो मालिक मुक ना सिखएहए मय घरै अपनेस कुटपिट करन लगो इतए दुकानसे देखके जामओं घरे जाएक बनामओं कुर्मा मैकी काकी,भौजीनसे समान माग माग बनामओ,बिनसे कहेकरओंकी मय तुमर समान फ्रिमे बनादेहओं सोइ मए सिखजएहओं तओ बे सब लाए लाए देन लगी ऐसी मय बिछिया,सिकरी बनान सब सिखगओ ।
एकदिन हरि मिलनकी मालिक हरि मिलनसे कही तय अच्छो आदमी हए,इमानदार हए तय अबसे काउन्टरमे बैठीए । और १८०० रुपैयाके संगए एक पहारको खानु फिर देन लगे । पर हरि मिलन काम सिखन चाहत रहए । हरि मिलनके लगो की मिर मालिक मुक सिखन ना देन चाहत हए । घरै बनाए बनाए सिखन लगो कोइ कोइ बनौनी रुपैया भि देन लगी ऐसी एकदिन हरी मिलन काम करन बाली पसलमे बिनकी काकी बिछिया बनौनी रुपैया देनके पुग्गै बोदिन हरी मिलन मालिक के घर काम करनके गए रहएं । हरीमिलनकी काकी कही मालिकसे जे ३०० रुपैया हरि मिलनके दैदियो बिछिया बनौनी रुपैया ,मालिक सोचमे पडगओ की कहां की बिछिया की हरीमिलन हिनसे चुराएके त ना बेचत हए ,फिर जब हरी मिलन आवता मालिक पुछी तओ हरीमिलन कही की घरे मय बनाएकरत हओं ।तओ मालिक हरिके बनान बालो कामभी दै पर चाँदीको काम इकल्लो दै ।
हरी मिलन अपन मालिककी पसलसे लैके घर तकको काम करत रहएं । पसलको झाडुपोछासे लैके घरसम्मको झाडुपोछा लगात रहएं,हिन तककी मालिकके घरमे कोइ पहुना आतेता हरी मिलन काम करनके जात रहएं जा मेहनत और लगनशिल देखके हरी मिलनके काउनटर को जिम्मा दैरहएं ।
हरी मिलनके १८०० मे पेट पालन बहुत अघटो पडत रहए। पसलको समान इतए उतए कभी चौराहा त कभी भन्सार देनके पठात रहए तओ एक चक्कर जान ताहीं २०,३० रुपैया अटो भाडा देत रहए ।बे रुपैया अटो मे ना बैठके हरी दौरत बे समान देन जात रहए । कभी ३,४ चक्कर पठात रहए मालिक सबचोटी अटो भाडा देबए मए बे सब बचएके दौरत समान देन जामौ बे रुपैया बचानके ताहीं कभु दिनको २००,३०० हुइजामएता मुक सजिलो पडए कहीके हरी मिलन बतात हएं ।
हरीमिलनके ३ वर्ष पच्छु एक दुसरी दुकानसे अफर आव हुन ६००० देहओ कही हरीमिलन जा बात अपन मालिकके बताइ तओ मालिक हरीमिलनके ना जान दै कही मय तलब बढादेहओं तओ ३ वर्षमे मालिक ३५०० तलब करी । हरी मिलन अपन मालिकको भरोसा ना तोरी जद्धा रुपैया देन ठाउंमे ना गए । हरीमिलन कहात हएं मिर मालिक अच्छो रहए मिर ताहीं इतए उतए जान ताही साइकिल फिर किनदै । कुछ समय पिच्छु फिर एकठिनसे मुक अफर आओ हुना ११००० दिबैया रहए मय हुना अपन कक्कुके लगादओ मयना गओ मिर मालिक के पता चलोकी फीर अफर आओ तओ मिर तलब ४५०० कर्दै । ११००० देन बालो ठाउंमे सबकोइ जान चहीतो पर मुक मिर मालिक बहुत बडो सहयोग करीरहए जब मिर बैयर बिमार पडी तओ तुरुन्त ८००० रुपैया इलाजके ताहीं दैरहए । रुपैया सबकुछ होत हए कहात हएं पर मय कहात हओकी जौन जरुरी पडेम सहारा देत हए बो सबसे बडो होत हए ।
हरिमिलन हुना १३ वर्ष काम करी पर ५००० से जाधा तलब ना बढी रहए बिनकी फिरभि १३ वर्ष हुना कटाएदैं ।हरीमिलन सबकुछ बनानके सिखगए रहएं सोनो चांदी सबकी समान बनान लगे रहएं । एकदिन पानी भरनके दुसरी दुकानके सटरमे गएरहएं तओ हुना एक सटर खाली देखी त हुनके आदमी से पुछी जा सटर खाली हए?बोदिन इतकाए पुछी रहएंकी भोरभए मालिकठिना बात पुग्गैकी हरी सटर लिबैयाहए दुकान खुलैया कहीके । हरी मिलनकी मालीक कहान लगो तय मुक बताओ फिर ना इत्तो वर्ष तक संगए फिरभी मुस सल्लाह ना लओ पर बा समयमे हरी पसल खोलन ना सम्खी रहएं जा बात अपन मालिकसे फिर कही पर मालिक उल्टए सुनाइ तओ अन्तीममे हरी कही की अब जैसे भि खोलङगो पसल मालिक कहान लगो की आधीआधी लगानीमे खोलएं पर हरी कही नाए मय छोटी दुकानसे सुरुवात करहओं पर इकल्लो करहओ ।
जब घरे आए हरी तओ सम्खए मालिकके अग्गुता कहीआओ दुकान खुलहओ तओ खोलओं कैसे सुनचाँदी पसलमे ता लगानी फिर गजब लगथए । फिर बे अपन बैयरकी जितनो गाहना रहए सब मागी कहीं जे गाहना मुक हभएके ताहीं दैदेओ मय पिच्छु बनबादेहओं । घरबाले फिर सहयोग ना करी पसल ना चलापएहए डुबादेहए कहीके एकु रुपैया ना दै। हरि मिलन कहात हएं बैयरकी गाहना बेचके १००००० को छोटीसी दुकान कीनो फिर पसल भितर लगानी लगान ताहीं मिर बैयरकी दिदिजिजा दै रुपैया बहेसे मय दुकान धरपाओ । छोटी दुकानसे सुरुवात करो आज सबकुछ हए ।
हरीमिलन कहात हएंकी कोइफिर काम छोटो नाहोत हए । लगन और मेहनत से करत हएता जरुर सफलता मिलत हए । जबतक आदमीकी जिन्दगीमे ठेस ना लगत हए तबतक जिन्दगी का हए पता ना चलत हए ।
कामके ताही भटकन बाले हरि मिलन, आज बिनकी कारणसे कैयो आदमीक घरमे चुल्ही जलरही हए । कैयौ आदमीके काम दएपडे हएं । आज आएके बे कैयौ सामाजिक काममे सहयोग करत हएं । गाउंघरमे बात काटन बाले आदमी अब तारीफ करत हएं ।

लेखनः सरस्वती राना

सुदुरपश्चिम प्रदेश धनगढी, कैलाली
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