१८ जेष्ठ २०८३, सोमबार
बि प्लस खबर

डकहर (ढाँक) का हए, जा कहाँसे सुरु भओ ?

खबर सम्बाददाता ३० श्रावण २०७८, शनिबार
डकहर (ढाँक) का हए, जा कहाँसे सुरु भओ ?

भानु प्रताप राना , सामन ३० ,धनगढी

डकहर रानाथारुकी एक परम्परा हए । तमान गाँवमे डकहरसे ढाँक फिर कहात हएँ । जा सामन महिनाकी शुक्ल पञ्चमी (नाग पञ्चमी )के रोज खेलत हए । जा चलन बहुत अचम्मो परम्परा हए । भगमान हएकी ना कहिके तमान चोटी आदमी शंकाकी दृष्टीसे देखत हएँ । पर जा परम्परा विना भगमान आए सम्भव नाहोत हए । अपन दिउताके सौरके बुलानसे अपन उपर सवार होत हए तबही दिउता चढो मानत हएँ । बहे दैविय शक्तिसे पिठमे जोड जोडसे चाभक मारपात हएँ भर्रा बतात हएँ ।

डकहर कहाँसे सुरु भओ ?
डकहर कहातय नाग पञ्चमीसे जुडत हए । बहुत पहिले एक गावँमे एक किसान रहए । बो किसान एक दिन खेत जोतन जात रहए । तबही बो नागके चिबदादै औ नाग मरिगऔ । जा बात नागिन पता पइगइ । पहिले ता पतिकी शोकमे खुब रोइ बिलाप करी फिर बो नागिन बदला लेन सोचन लगि ।
सामनकी महिना रहए किसान धान नरान जात रहए । जहे मौकामे नागिन किसानके डसलै । गावभर जा बात फैलगइ । बा समयमे कहुँ अस्पताल ना रहयें । तौ हरेक बात भुत परित भर्रा समारो करत रहयें ।
पुराने समयमे जब आदमी नुन,हरदी,लहसुन, प्याज ना खात रहयें तौ आदमीकी फिर विष होत रहए । भर्रा चुसा लैके बिष चुसलेत रहयें । पर नाग कहेसे सापकी देबता होत हए औ नागमे सबसे जद्धा विष होतहए । नागकी विषके अग्गु अदमीकी विष कम पडिगव ।
दुसरी बात का कहाइ रहएकी नाग नागिन जैसे फिर बदला लैके छोडत हए । अगर एक चोटी बचाए फिर लेमंगे तबफिर दुसराएके डस सकत हए । एकदम समस्या हुइगइ रहएँ।
सबजनै सल्लाहा करके तपस्या करन लगे । गावभरकी श्रद्धाके अग्गु नागिनके आनय पडो जैसी नागिन आइ सब बाकी पुजा करन लगे , नागिनके दुध पिबान लागे , दुधए दुधसे हदबान लागे । पर नागिन ना मानी कहान लागीकी मए जैसे फिर बदला लेमंगो ।
डरके मारे गावँबाले अपनेके मारन लागे औ कहान लागेकी हमे माफ करदेओ नागिन जबतक माफ ना करैगे तबतक हम अपनेके मारत रहागें । औ अपनेके मारत रहे सब मरन मरन हुइगए । जा बात भगमान तक पुग गइ , अपन जनता के बचानके ताही स्वायम भगमान सवार हुइगए ।
जब जा बात नागिन पतापाइ औ भगमानके अग्गु झुक गइ । गावबाले सब बहुत खुशी भए । नाचन गान लागे मदरा, थरीया बजान लागे । सबजनै नागिनकी पुजा करन लागे । दुध चढान लागे । नागिन फिर खुब खुशी भइ । औ किसानके माफ करदै , खुद अपनय विष चुस लै । बो दिन नागपञ्चमीकी रहए । बहे दिनसे नाग पञ्चमीमे डकहर खेलत हएँ।

डकहर काहे खेलत हएँ
भर्राकी मन्तुर सिद्ध करन ताही डकहर खेलत हँए । डकहर खेलके भर्राकी मन्तुर एक वर्षके ताही नविकरन हानी हुइजात हए ।कोइ कोइ भर्राकी मन्तुर जब कम लागन लागत हए तओ डकहर खेलके फिर पहिली हानी काम करत हए कहिके जन विस्वास हए ।
पुरानो जबानामे जब अस्पताल औ डाक्टर ना रहँए गाँवमे महामारी फैलजात रहए गाँवमे जब आदमी,डंगर जद्धा मरन लगत रहँए । धान गेंहु बिगडन लागत रहँए तओ गाँव बिगड गओ गाँव समाहरनके गावकी खेरो बाधन ताही डकहर खेलत हएँ ।
डकहर खेलेसे रोग ब्यादी दुर होत हए मान्यता हए तबही तमान आदमी सदामान बेमार होत हए तओ अपन जीवनमे सुख शान्ति पान ताही डकहर खेलत हएँ ।
रानाथारु कैलाली, कञ्चनपुरके आदिवासी हएँ । जे जिल्ला जद्धा गरम या घामु होनिया ठाव हए । तबही हियाँ साँप गदेरोके समस्या देखा पडत रहए ।साँपकी राजा नाग देवताके पुजा करेसे कोइ साँप ना काटत हए । तबही नाग देबताके खुशी करन नागपञ्चमीमे नागकी पुजा करत हएँ औ डकहर खेलत हएँ ।

डकहर कैसे खेलत हएँ ?
नागपञ्मीकी दिन सबेरेस हदालेत हँए । नागदेबताकी पुजा करत हएँ । आजकाल धरकी मोखोमे नागकी फोटो फिर चिम्टात हएँ । डकहर खेलनबाले आदमी बर्त रहात हँए । नागपञ्चमी आनसे पहिले भर्रा सल्लाहा करलेत हएँ । डकहर सब भर्रा ना खिलापात हएँ । खास करके जा के गौंटेहर (गौटर्रा) भर्रा खिलात हए । डकहर खेलनसे पहिले हडियामे बारकी साँप बनाएक धरत हएँ । हडिया जमिनमे नाए पैराकी उडला बनाएक धरत हँए । हडियाके फुलकी थरियासे तोपत हएँ औ बहे थरिया हातसे बजात हएँ । डकहर खेलनबालो आदमी अपन देबताके सच्चे मनसे बुलात हएँ । देबता बिनमे सवार होत हए तओ बे हालन लागत हएँ औ चाभकसे पिठमे जोड जोड से मारत हएँ । ऐसे मारत पेती एकु ना पिरात हए खेलनबाले बतात हएँ । चाभक मार मारके जब सेहर जात हएँ तओ हडियामे चुसा लेत हएँ ।
चुसा लेनसे साँप कि विष ना लागन देनबाली शक्ति मिलत हए भर्राकी कहाइ हए । जब कोइके साँप काटदेत हए तओ ढकहर खेलेभए आदमी औ भर्रा इकल्ले चुसा लैपात हएँ ।
डकहर खेलन का का समान जरुरी हए
डकहर खेलन ताँहीं चाभक, छडी, हडिया, फुलकी चहुँ काँसकी थरिया, बार, चौका लगानबाली मट्टी औ सतनजा ( सात अन्नको समूह ) जरुरी हएँ ।

सुदुरपश्चिम प्रदेश धनगढी, कैलाली
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