भानु प्रताप राना,धनगढी
रानाथारु समुदायमे आज धुमधामसे अट्टमी मनाए रहेहएँ । अट्टमीमे रानाथारु समुदाय निरहार बर्त बैठत हएँ । श्री कृष्ण ‘कान्हैया’ भगमानकी जन्मोत्सवमे अट्टमीक मनात हएँ ।
रानाथारु समुदायमे खिराके श्रीकृष्ण भगवान मानके ब्रत बैठत हएँ औ रातभर जागरण करके मनात हएँ । जा तिउहारकी दिन ब्रत बठैत हएँ दिनभर कछुनाखात हएँ रातके १२ बजे ब्रत खोलत हए ।

अट्टमीके रोज घरको एक जनै गाेंडीबाले खिरा तोडके लाएके बहेक कन्हैया मानत हएँ । साँभके बहे खिराके डोला डुलात हएँ । डोला कट्ठाकी पिजडा हानी बनाएके आसपिससे डोरा लपेटके उपरसे तुल उढादेत हएँ । बहेक बीचमे पलखिया या फिर डोला डोलनबालो बनात हएँ । बहे पलखियामे खिरा धरत हएँ ।
ब्रत बैठनबाले सबए आदमी डोला डारन ना पातहएँ । डोला डारन ताहीँ तीन वर्ष ब्रत बैठो होन पडत हए । अट्टमीकी रोज भितमे फिर तमान मेलके चित्र बनात हएँ ।

अट्टमीकी ब्रत रातके खुलत हए तबही दिनभरी तयारी चलत हए । अट्टमीकी सबसे खास होत हए खजुरिया । गेहुकी चुन मे मिठाइ मिलाएको माडत हए औ पिटौवा बनाएक तिनकोहनी काटत हएँ और तेलमे तारत हएँ ।
साँझके ब्रत बैठनबाले होम पुजा करत हएँ । जबतक जोनी नादिखात हए तबतक ब्रत ना खोलन मिलत हएँ । पर अगर बदरी हए कहेसे १२ बजे पिच्छु ब्रत खोलत हएँ । तमान आलमी रातभर भजन किर्तन करके जागरण करत हएँ ।
अट्टमीमे लोग ठडिया नाँच फिर खेलत हए । बैयर बैठक्कि गित गाएके रात काटत हएँ । तमान बुढ्ढा बुढिया आदमीकी मुहुसे दासतान सुनके खुबए रमाएके रातभर जगत हएँ ।

भेर भए सबेरे छोटे बच्चा कुश काटके लात हएँ । जौन जौन धरमे अट्टमी होत हए बेही घरबाले कुशमे पानी, दुध डारके हरदी मिलाएके घरके आसपिस छिरकत हएँ । जासे दुधकानो कहात हएँ ।

दुधकानो घरघर ठडिया नाच खेलके करत हएँ जासे घरमे सुख शान्ति होत हएँ । बहे पानीसे कुइ कुइ घरके मुखियाके टाङ्ग फिर धोत हएँ ऐसो करनसे दुखः कष्ट औ रोग भाजत हए जनविश्वास हए । दुधकानो करत हएँ तऔ घरबाले जो जुरात हए बो दान देत हएँ । अट्टमीकी भोरभए साँझके कन्हैयाकी सठी करत हएँ औ गाँव भरेनके खान बुलात हएँ ।