द्वापर युगमें राजा अंगको लौडा राजा बेन, राजा बनके सात लौडिया १दुर्गा – भवानी २, कालिका ३, ज्वाला ४, होलिका ५, सितला ६, गंगा ७,अंगारमति
जब राजा बेन कि गरिबि आई खानपिन पेट गुजारा कुछनाय रहिगाओ
तव एकय साहारा रहए वनजंगल
राजा बेन अपनी सातौं लौडिया से कही घरमे दाना पानी सब निभटगओ बनमें करौधा तोरन चलएं ।६ बहना तैयार भै एबसे छोटी बहना अंगारमति जान तैयार नाभै ।
दौवा लौकामें पानी भरके ६ बहना सहित बनमे करौधा तोरन निकरपडे । जब घनघोर बनमे पुगत है तव दौवा ६ बहनासे कहात है । बिटिया चारौघेन बिगदजाबौ लौडिया विगदगई, अपनउ अकेलो करौधा ढुंडनलागो जव दउवा के पानी पियासलगी लौकाको पानी पिके एक रूखाको हंगामें खाली लौका टांगदै । उतए दौवा ६ बहना के ढूंडत है कहूँ अतापता नाए चलतहए । इतय ६ बहना अपने दौवाके ढूंडत है ढूंडत ढूंडत नाय पात है खुद अपना बहिगयी ।एकठिना भुं…भुं.. कि अबाज सुनत है भुं..भुं ठिना पुगत है ता खाली लौका हंगामें टंगो देखत है पर देउवा नाय रहै ।
६ बहना भूखी पियासी घनघोर बनमें भटकतरही अबका करै सबय जनि एकठिना बैठके अपनो मैल छुटायके मैल से प्रतिरूप भैया बनाइ आज हम करिया के रूप में जानत है ।
बाद में मानुष समाजके खेरो मे कोई कहूँ कोई कहूँ जायक बैठगइ ।ध्यान देनबारी बातका है बे ६ बहना मनुष्य के भलो करी धिरेधिरे ६ बहनाके भवानी के रुपमें पुजनलगे और समाज में पुज्यमान भैयीं । तभी आपन रानाथारु समुदाय आजके दिन विशेष चेंचर, मिसौला मिठो पकवान से और सात बहना भवानी (करिया) के गाउक पधना या भर्ना पूजा करके चराई मनात है । आजतक हमरे समाज में चराई पुजन बिद्धमान हए ।
लेखक गोविन्दराज राना
ठेगाना: धनगढी १० जुगेडा